इस दुनिया पर पूंजी बड़ी बाजारवाद का कब्जा है इसलिए टीवी, मोबाइल देखकर मनुष्य भौतिक वस्तुओं के संग्रह को जीवन के मानक समझने लगता है। Western देशों का मानक धन है , एशिया में कर्म, धन तो कोई भी कमा सकता है। वेस्टर्न देशों में बुद्धि,की कमी हमेशा से रही है। जो विदेशी संस्कृति के गुलाम है उन्हें ये सच महसूस करना चाहिए शुरू से शुरू करते है। जीवन क्या है पहले इसे समझते है। पृथ्वी पर 828 करोड़ मानव जाति हो चुकी है। पर जीवन के मानव इस धरती पर सर्वप्रथम हमारे आर्यावर्त में ही लिखे गए थे , जो बिल्कुल समय हीन है , आज से हजार साल बाद भी सही होगे। मानव जाति 4 प्रकार की है , (उत्तम,मध्यम,अधम, खल) और ये कर्म पर आधारित है । यानी भेदभाव का सवाल ही नहीं ए क जीवन में कई चीजें हैं 1. आध्यात्मिक जीवन - मनुष्य ही कर सकते है। या को खोजेंगे या फॉलो करोगे जिन्होंने खोज की वो संत,ऋषि, ईशा बुद्ध बने बाकी अनुयायि (20%) 2. सामाजिक जीवन - 197 देश, वृक्ष जाति, पशु जाति, मानव जाति यानि= समाज 🇮🇳। तुम्हारी दुनिया कितनी बड़ी है ये सोचने वाली है (20%) 3...
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