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(जनता)राजा वनाम नौकर (लोकसेवक ) | अविनाश पाठक

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केवल तथ्य कोई भावनाएं नहीं (समाजशास्त्रीय नजरिए से )  देश की 90% जनता 9 हजार से कम कमाती हैं।  देश 50% कर्ज में है और जीडीपी 8% लगभग, लोकसेवकों के वेतन पर जाता है। 40 हजार से ऊपर तो मिलता हैं , लोकसेवकों को  ऊपर से रिश्वतखोर राष्ट्रद्रोही भी डाटा अनुसार 85% रिश्वतखोर है  सबसे पहले पर पुलिस ही है ( ये डाटा अनुसार....)   ड्यूटी के समय मोबाइल चलाते, इंडियन रील सर्विस करते है। अब रील छाप लोकसेवक, डीएम, SDM, सब कर रहे हैं  दिखावा सिर पर चढ़ा है। काले अंग्रज़ों की तरह हरकते   वर्दी की मर्यादा अनुशासन कुछ भी नहीं है । देश की सेवा के लिए लोकसेवक बना जाता है । जनता को सर बोलते है ये क्या कभी ? जबकि राजा तो जनता ही है लोकतंत्र में?  आम लोगों के साथ क्या करते होंगे ये ?  उपाय  🇮🇳 अनुशासन अधिनियम 2024 (जो मैंने लिखा है)  सभी लोक सेवकों के लिए, अग्रेजों ने जितना लूटा है उससे ज्यादा भ्रष्टाचार ने देश को बर्बाद किया है।  लेख लिखने की प्रेरणा दिल्ली पुलिस, अधिवक्ता प्रकरण से  पर जो सत्य हो वो बाहर आए । ये चाहुंग...